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मनमोहन सिंह की बड़ी असफलताए

Posted On: 16 Sep, 2010 Others में

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वैसे तो मनमोहन सिंह की ईमानदारी पैर कोई प्रश्न नहीं उठा सकता लेकिन लोकतंत्र में लितानी आवस्यकता आर्थिक ईमानदारी की होती है उससे कही अधिक नैतिक रूप से इमानदार होना चाहिए यही बहुदलीय लोकतंत्र की खूबी और खासियत है.इस मोर्चे पैर मनमोहन सिंह घोर अनैतिक ठहरते है क्योकि राज्यसभा के लिए आसाम से चुने जाने हेतु उन्होंने गलत पता दिया माकन नो.३९८९ में कभी रहे ही नहीं और नहीं कभी जाहिर किये की उनका आसाम से भी कोई सम्बन्ध है.एक प्रधानमंत्री के लिए यह घोर अनैतिक है की दुसरे कार्यकाल के लिए भी उन्ही झूठे हथ्खंदो का सहारा ले केर फिर कुर्सी पैर बैठ गेर यह अनैतिकता की पराकाष्ठा थी जो बगैर लोकसभा के आम चुनाव में प्रत्यासी बने ,पर्चा भरे प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो गए.संविधानिक रूप से सही होते हुए भी घोर अन्तिक था लोकतंत्र की बुनियाद परम्पराव से चलती है इंदिरा गाँधी ने आपातकाल भी संविधान के दायरे में ही घोषित किया था तो क्या उसे हम न्यायोचित ठहरा सकते है.इसतरह मनमोहन नैतिक रूप से बेदाग नहीं कहे जा सकते देश का दुर्भाग्य है की डॉ.लोहोया और राज्नारें जैसे नेता नहीं रहे नहीं तो मनमोहन को जबाब देना असंभव हो जाता.उनकी दूसरी बड़ी असफलता बलूचिस्तान मुद्दे पैर अपनी असावधानी से हमेशा के लिए देश को रचात्मक होने को बाध्य केर दिया,राष्ट्र मंडल खेलो का आयदिल्ली में उनकी नक् के नीचे हो रहा है जिसमे जम केर लूट हो रही है औरराज्कता का माहौल है तयारी किसी तरह लीपा पोती हो रही है जिसमे मनमोहन की कोई भूमिका नहीं है.आखिर कोई प्रधान मंत्री अपने सामने इस तरह की अव्यवस्था और लूट पैर निगाह फेरे रह सकता है.महाराष्ट्र में उ.प.,बिहार के लोगो की अनावश्य पिटाई पैर ख़ामोशी नाजी तोड़े यह भी उनकी असफलता ही कही जाएगी क्योकि संविधान प्रदत्त अधिकारों,देश के किसी हिस्से में व्यापर करने की आजादी प्प्प्पका अपहरण विलासराव देशमुख के सहमती से हो रहा था और इस पैर प्रधानमंत्री की ख़ामोशी HAIRAT

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

preetamthakur के द्वारा
September 16, 2010

The issue pertains to EC who accepted his nomination and at this stage it is not fair to comment. But one thing I may ask. If not Shri Man Mohan then who? Think, how gracefully Sonia jee refused the PM post and handed to a world renowned economist. In my opinion he is the best choice amongst available alternatives. We should not forget that we have seen four or five Prime Ministers within a span of four years and India had to morgage its gold reserves with international banks. We should learn from that. Every politician is willing to become PM, please note why? thanks.

    om prakash shukla के द्वारा
    October 22, 2010

    pritam ji apki pratikriya ke liye dhanyvad loktantra me natikta bahut mahtyvpurd hoti hai hamara loktantra ka jiske anusar hamara samvidhan bana britan ki natikta se tulna karni chahie aur jaha tak sonia ji ke tyag ka prashn hai to ager unhe itana hi tyagi banana tha to bajpei ji ki sarkar girane ke bad bagar bahumat ke rashtrapati ke yaha guhar kyo lagai thi ki mere pas bahumat hai,wah to mulaym singh ne samarthan dene se mana ker diya aur aomanit ho ker badh gayi us samay tyag kaha so raha tha,sonia ji wahi din fir nahi dekhana chahti thi isliye yah natak hua aur apke tyag ki devi ne apne bete ke bhavishya ke liye aisa admi chuna jisaki koi jad na ho ki kal gaddi chodsane se mana ker de.yahi ek khasiyat hai manmohan ki aur isi liye unhe chunaw bhi nahi lada rahi hai ki jab chahe we gaddi khali ker de isi liye manmohan singh bar bar duharate rafhte hai ki rahul ke liye kursi khali hai.kabiliyat me manmohan nahi to ho kya ho ki khali jagah bharne ke liye sirf rahul gandhi hi bache hai.mujhe aplogho ke vicharo per taras ata hai.


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